द्वादश ज्योतिर्लिंग जहां स्वयं शिव निवास करते हैं, कहां और कैसे घूमे

द्वादश ज्योतिर्लिंग जहां स्वयं शिव निवास करते हैं, कहां और कैसे घूमे

Posted On : 2024-02-20

द्वादश ज्योतिर्लिंग जहां स्वयं शिव निवास करते हैं, कहां और कैसे घूमे

भारत में जिन-जिन स्थानों पर भगवान शंकर का प्राकट्य माना गया है, उस स्थान पर ही यह शिवलिंग विराजित है; जिन्हें ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है।

इन स्थानों के पीछे अनेक प्रकार की किवदंतियां मान्यताएं व कहानी आदि शामिल है, जो स्थान को विशेष बनाती है। यह ज्योतिर्लिंग अपने आप में एक शक्ति का केंद्र होते हैं। जब भी व्यक्ति ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव को मानकर दर्शन करता है, उसे एक नए शक्ति का आभास होता है।

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प्रत्येक हिंदू परिवार अपनी आस्थाओं के अनुसार प्रयास करता है, कि वह अपने जीवन काल में इन सभी बारह  ज्योतिर्लिंगों के दर्शन अवश्य करें।

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बारह ज्योतिर्लिंग जो की भारत के अलग-अलग भागों में स्थित है। यहां पर ट्रेन के द्वारा भी आसानी से पहुंचा जा सकता है।

सोमनाथ ज्योर्तिलिंग

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

त्र्यंबकेश्वर ज्योर्तिलिंग

वैद्यनाथ ज्योर्तिलिंग

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

 

  1. सोमनाथ ज्योर्तिलिंग

यह ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम है। यह गुजरात के सौराष्ट्र जिले में समुद्र तट के किनारे स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग अपनी अकूत संपदा के लिए भी विख्यात था। इसके बारे में सुनकर महमूद ग़ज़नवी ने इसे 17 बार लूटा और मंदिर को नुकसान पहुंचाया।

लेकिन आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया और आज भी मंदिर का ऊपरी हिस्सा सोने का बना हुआ है।

  • मान्यता:- मान्यताओं के अनुसार चंद्र देव ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की व परिणाम स्वरुप शिवजी प्रकट हुए और इसी स्थान पर विराजित हो गए जिसकी वजह से इस शिवलिंग का नाम सोमनाथ पड़ा।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- यदि आप ट्रेन माध्यम से सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना चाहते हैं, तो सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल होगा जो की ज्योतिर्लिंग से महज 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वेरावल आने के लिए ट्रेन अहमदाबाद से मिल जाती है।

 

  1. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

मल्लिकार्जुन जो कि श्री शैल के नाम से भी जाना जाता है। यह आंध्र प्रदेश के पश्चिमी भाग के कुर्नूल जिले में नल्लामल्ला जंगलों के बीच स्थित है।

यह ज्योतिर्लिंग जंगल के बीच होने के कारण प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है व आसपास का आच्छादित वन इस स्थान की महिमा को और बढ़ा देता है।

यहां शिव की आराधना मल्लिकार्जुन के नाम से की जाती है। यहां का गर्भ ग्रह बहुत ही छोटा है, जिस वजह से एक समय में केवल एक ही दरसनार्थी भगवान शिव के ज्योर्तिलिंग रूप में दर्शन कर सकते हैं।

  • मान्यता:- मान्यता के अनुसार यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है; जहां शिव के साथ ज्योति रूप में पार्वती जी विराजती हैं व कहा जाता है कि मल्लिकार्जुन दर्शन करना अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर माना जाता है।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- यह मंदिर जंगल में होने के कारण यहां से 81 किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन स्थित है, जिसका नाम मारकापुर रेलवे स्टेशन है। यहां आने के पश्चात बस के द्वारा बाकी यात्रा पूरी की जा सकती है।

 

  1. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। यहां भगवान शिव को अलग-अलग रूपों में सजाया जाता है व यहां भगवान शिव का रौद्र रूप देखने को मिलता है।

कॉरिडोर बनने के पश्चात इस स्थान पर यात्रियों का आवागमन काफी बढ़ गया है। यह ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में तीसरा स्थान रखता है, जोकि शिप्रा नदी के किनारे स्थित है।

  • मान्यता:- मान्यता के अनुसार यह एकमात्र दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग है और यहां दर्शन करने के उपरांत मान्यता है, कि उस व्यक्ति की अकाल मृत्यु टल जाती है।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उज्जैन ही है। यहां दिल्ली वह अन्य राज्यों से आसानी से गाड़ियां उपलब्ध रहती है।

 

  1. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खांडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर अवस्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से चौथा ज्योतिर्लिंग है।

यह स्थान एक ऊंचे पहाड़ी पर स्थित है, जिसके पास से नर्मदा नदी बहती है। इस स्थान को ऊपर से देखने से यह ओम के आकार का प्रतीत होता है; जिसकी वजह से इसका नाम ओंकारेश्वर रखा गया।

  • मान्यता:- कहा जाता है कि राजा मांधाता ने कठोर तपस्या के पश्चात भगवान शिव को प्रकट किया व उनसे यही रहने का वरदान प्राप्त किया।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन इंदौर पड़ता है। इसके बाद यहां से बस माध्यम से ओंकारेश्वर पहुंचा जा सकता है; अन्यथा महाकालेश्वर के दर्शन के पश्चात उज्जैन से भी ओंकारेश्वर के लिए बस सुविधा आसानी से मिल जाती है।

 

  1. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र तल से 3583 मीटर ऊपर स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से पाँचवाँ ज्योतिर्लिंग, चार धाम में से एक धाम व पांच केदारों में एक केदार भी है।

सर्दियों में मौसम प्रतिकूल रहने व अत्यधिक मात्रा में बर्फ गिरने के कारण स्थान को सर्दियों में बंद रखा जाता है।

  • मान्यता:- कहा जाता है कि यहां महादेव ने पांडवों को बैल के रूप में दर्शन प्रदान किए थे व वर्तमान में इस मंदिर की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने आठवीं शताब्दी में की।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- इसका नजदीक रेलवे स्टेशन देहरादून, हरिद्वार व ऋषिकेश पड़ता है जिसके बाद पहाड़ी स्थान होने के कारण आगे का सफर बस के माध्यम से ही पूरा करना पड़ता है।

 

  1. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट के सह्याद्रि पर्वत पर स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से छटा ज्योतिर्लिंग है, जो अपने मोटे आकार के होने के कारण इन्हें मोटेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से भी पुकारा जाता है।

  • मान्यता:- यह मंदिर भी ऊंचे पर्वतों पर बना है वह यहां पास से ही एक भीम नाम की नदी निकलती है जो कि आगे चलकर कृष्णा नदी से मिल जाती है।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- करजात भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के सबसे करीब का रेलवे स्टेशन है; जो की इस स्थान से 168 किलोमीटर दूर है। जिसके बाद बस द्वारा इस स्थान पर आया जाता है।

 

  1. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा के किनारे स्थित है। बारह ज्योतिर्लिंगों में इसका स्थान सातवां है।

इस मंदिर को कई बार मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़ा, लेकिन वर्तमान में इस मंदिर का पुनर्निर्माण अहिल्याबाई होल्कर ने किया। कहा जाता है कि यह स्थान स्वयं शिव के द्वारा बसाया गया है और स्वयं भगवान शिव यहां निवास करते हैं।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के पश्चात यह उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन चुका है।

  • मान्यता:- मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति काशी में देह त्याग करता है, भगवान शिव स्वयं उसे मोक्ष प्रदान करते हैं।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- यहां का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वाराणसी है; जो कि भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जुड़ा है।

 

  1. त्र्यंबकेश्वर ज्योर्तिलिंग

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के त्रयंबक में ब्रह्म गिरी पर्वत पर स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में आठवां स्थान रखता है। इसी ब्रह्म गिरी पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम होता है

यहां मंदिर काले रंग के पत्थरों से निर्मित है, जोकि प्राचीन वास्तुकला का एक प्रमुख उदाहरण है।

  • मान्यता:- यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है; जहां ब्रह्मा विष्णु व महेश तीनों के दर्शन मिलते हैं।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- नासिक इस ज्योतिर्लिंग के सबसे नजदीक का रेलवे स्टेशन पड़ता है; जो की मंदिर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है।

 

  1. वैद्यनाथ ज्योर्तिलिंग

यह ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंग में नौवां स्थान रखता है। इस ज्योतिर्लिंग को कामना लिंग भी कहते हैं।

यहां प्रत्येक वर्ष सावन के समय मेले का आयोजन होता है। जिसमें श्रद्धालु गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

  • मान्यता:- इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान शिव के परम भक्त रावण ने की थी।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- वैद्यनाथ धाम के सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडीह जंक्शन है जो की झारखंड में स्थित है। यह रेलवे स्टेशन मंदिर से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित है।

 

  1. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारिका में समुद्र तट से कुछ दूर पर स्थित है। यह गुजरात का दूसरा ज्योतिर्लिंग व बारह ज्योतिर्लिंगों में से दसवां ज्योतिर्लिंग है।

औरंगज़ेब ने बाकी मंदिरों की तरह इसको भी क्षति पहुंचाई इसके बाद इसका पुनर्निर्माण अहिल्याबाई होलकर के द्वारा किया गया। यह स्थान द्वारका से 17 मील दूर स्थित है।

  • मान्यता:- शिव पुराण की रुद्र संहिता के अनुसार भगवान शिव को नागों का देव बताया गया है और इन्हीं के नाम पर इस ज्योतिर्लिंग का नाम नागेश्वर रखा गया।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- द्वारका नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित रेलवे स्टेशन है। यहां के लिए अहमदाबाद से कनेक्टिंग ट्रेन मिल जाती है।

 

  1. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह स्थान एक प्रकार का टापू है जो की समुद्र से घिरा हुआ है। यह स्थान बारह ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग है व चार धामों में एक धाम भी है।

  • मान्यता:- मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम ने रावण वध के पश्चात ब्रह्म हत्या के पाप से निजात के लिए भगवान शिव की शिवलिंग बनाकर आराधना की और वह शिवलिंग आज भी यहां विद्यमान है।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- इस स्थान का सबसे नजदीकतम रेलवे स्टेशन रामेश्वरम रेलवे स्टेशन ही है यहां भारत के अनेक भागों से सीधे ट्रेन आसानी से मिल जाती है।

 

  1. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के दौलताबाद से बारह मील दूर वेरुलगाँव के पास स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में इसका स्थान बारहवां है।

  • मान्यता:- मान्यता के अनुसार घुष्मा जो की एक ब्राह्मण की पत्नी थी। उसके पुत्र को बचाने के लिए महादेव ने इसी स्थान पर दर्शन दिए और इसी स्थान पर विराजित हो गए।
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन:- घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का नजदीकी औरंगाबाद रेलवे स्टेशन है यहां आने के बाद कैब या बस के द्वारा मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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