दिल्ली का चांदनी चौक क्यों है इतना प्रसिद्ध

दिल्ली का चांदनी चौक क्यों है इतना प्रसिद्ध

Posted On : 2024-04-13

दिल्ली का चांदनी चौक क्यों है इतना प्रसिद्ध

दिल्ली का चांदनी चौक देश के सबसे व्यस्ततम बाजारों में से एक है। जहाँ प्रत्येक दिन भीड़ का जमावड़ा रहता है। यह बाजार शाहजहाँ के द्वारा बनवाया गया था। जिसकी रूपरेखा उसकी बेटी जहांआरा ने की थी। यह बाजार पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन यहाँ से महज थोड़ी दूरी पर है। यह बाजार थोक व रिटेल दोनों प्रकार के विक्रेता व खरीददारों के लिए सबसे बड़ा बाजार है।

 

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चांदनी चौक के समीप मुख्य स्मारक व पर्यटन क्षेत्र

  • सीसगंज गुरुद्वारा  दिल्ली के नौ प्रमुख गुरुद्वारों में ये एक गुरुद्वारा है। सिखों के नौवें गुरु सिख तेग बहादुर जी की शहादत स्थल के रूप में यहां गुरुद्वारे का निर्माण किया गया।
    इसी स्थान पर मुगल बादशाह औरंगजेब ने सिखों के नवें गुरु तेग बहादुर जी का सर कटवा दिया था। आज इस स्थान पर गुरूद्वारे का निर्माण किया गया है और सिर काटने से पहले जिंस कुएं से गुरूजी को स्नान कराया गया था वह कुआं  यहां इसी गुरुद्वारे के अंदर संरक्षित है।
     
  • लाल किला यह किला दिल्ली के सबसे प्राचीनतम स्मारकों में से एक है, जो कि लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। यह किला पुरानी दिल्ली में चांदनी चौक के ठीक सामने स्थित है। यूनेस्को ने वर्ष 2007 ई में लाल किले को विश्व धरोहर के रूप में स्वीकार किया। इस किले का निर्माण पांचवें मुगल शासक शाहजहाँ ने करवाया था। इस किले में मुगल वास्तुकला शैली की प्रचुर मात्रा देखने को मिलती है। यह किला एक समय मुगल शासकों के अधीन रहा लेकिन मुगलों के पतन के बाद लाल किला ब्रिटिश शासन के अधीन आया जिसकी वजह से लाल किले की इमारतों पर ब्रिटिश शासकों की छवि स्पष्ट दिखाई पड़ती है। 
    आजादी के बाद से लाल किले को एक नया स्वरूप देखने को मिला और आजादी के पहले नेहरू के भाषण के बाद आज तक भारत के सभी प्रधानमंत्री इसी किले की प्राचीर से स्वतंत्र भारत को प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस पर संबोधित करते आए हैं।
     
  • जामा मस्जिद लाल किले से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर का निर्माण शाहजहाँ ने करवाया था। यह मस्जिद लाल बलवा पत्थरों व संगमरमर से निर्मित है; जिसका निर्माण 1650 ईस्वी में शुरू हुआ। 6 वर्षों के बाद इसका निर्माण कार्य संपन्न हुआ और इसको बनने में लगभग 10 लाख की लागत आई। मस्जिद के पूर्वी द्वार को केवल सप्ताह में एक बार नमाज के लिए शुक्रवार को खोला जाता है। कहा जाता है कि सुल्तान प्राचीन समय में इसी दरवाजे का प्रयोग नमाज अदा करने के लिए किया करते थे। मस्जिद में कुल 11 मेहराब है, जिनमें बीच वाला मेहराब अत्यंत सुंदर है। इन मेहराबों को सफेद व काले संगमरमर के पत्थरों द्वारा सजाया गया है।
     
  • मिर्ज़ा ग़ालिब की हवेली  वैसे मिर्ज़ा ग़ालिब किसी पहचान के मोहताज नहीं है व उर्दू के बहुत बड़े कवि थे। मिर्ज़ा ग़ालिब ने आगरा से आने के बाद यहीं पर अपना बाकी समय बिताया। कहा जाता है कि यह हवेली उन्हें किसी हकिम ने दी थी। आज यह हवेली भारतीय पुरातत्व विभाग ने सुरक्षित करके रखी है। इस हवेली का जीर्णोद्धार सन 2007 ईस्वी में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने किया व यहां पर एक मिर्ज़ा ग़ालिब की मूर्ति भी स्थापित की।

 

 

दिल्ली का प्रसिद्ध चोर बाजार

 

  • चोर बाजार कब लगता है

दिल्ली का प्रसिद्ध चोर बाजार प्रत्येक सप्ताह सुबह 4:00 बजे से दोपहर 11:00 बजे तक लगता है। इस समय दिल्ली के चोर बाजार में सबसे अत्यधिक भीड़ देखने को मिलती है। इसके अलावा यह मार्केट शाम तक भी खुला रहता है, लेकिन अत्यधिक सामान बिक जाने की वजह से सुबह के समय की प्रासंगिकता ज्यादा है।

  • दिल्ली का चोर बाजार क्यों है खास

दिल्ली के चोर बाजार में जरूरत का हर एक समान बहुत ही कम दामों में उपलब्ध हो जाता है, जिसके लिए खरीददार बहुत उत्साहित रहते हैं।

यहां पर बहुत ही सस्ते में मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक घड़ियां, चार्जर, विभिन्न प्रकार के कपड़े, बैग, पर्स इत्यादि समान मिल जाता है।

  • चोर बाजार जाते वक्त क्या रखे सावधानियां

दिल्ली का चोर बाजार जो कि अपने नाम से ही थोड़ा विवादों में रहता है। यहां पर बहुत से चोर और पॉकेट मार आपकी कीमती वस्तुओं को चुरा सकते हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि आप अपने महत्वपूर्ण कीमती वस्तुओं का अच्छे से ख्याल रखें ताकि आपको किसी भी प्रकार का नुकसान न हो।

  • दिल्ली के चोर बाजार की क्या है हकीकत

लोगों के अनुसार दिल्ली का चोर बाजार वह स्थान है, जहां चोरी का सामान बहुत ही सस्ते दामों पर उपलब्ध होता है। यह बात बहुत हद तक सही भी है। लेकिन हाल की बात करें तो यहां ज्यादा कपड़े और छोटे-मोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ही बेचे जाते हैं।

वहां किसी प्रकार के मोबाइल फोन वह महंगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बेचने की अनुमति नहीं है। लेकिन यदि आप मेहनत करेंगे तो अवश्य ही आप उन लोगों के संपर्क में आएंगे जो आपको सस्ते दामों पर मोबाइल फोन आपको दिला सके।

 

 

दिल्ली का अन्य राज्यों से यातायात संपर्क

  • सड़क मार्ग दिल्ली देश की राजधानी होने की कारण यह भारत के अनेक राज्यों से सीधा जुड़ा हुआ है जहां एनसीआर क्षेत्र से होते हुए दिल्ली में सीधा प्रवेश किया जा सकता है।
     
  • दिल्ली मेट्रो दिल्ली की लाइफ लाइन कहीं जाने वाली दिल्ली मेट्रो के द्वारा भी चांदनी चौक आया जा सकता है यह येलो लाइन पर स्थित है इसका मेट्रो स्टेशन जामा मस्जिद है। इसके अलावा लाल किला व चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के द्वारा भी यहां पर आया जा सकता है।
     
  • हवाई मार्ग हवाई मार्ग की बात करें तो भारत ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के द्वारा भारत के किसी भाग से नई दिल्ली पहुंचा जा सकता है। नई दिल्ली आने के लिए भारत के लगभग हर एक एयरपोर्ट से सीधी फ्लाइट देखने को मिलती है।
     
  • रेल मार्ग दिल्ली भारत के अन्य सभी राज्यों से रेल मार्ग के द्वारा जुड़ा हुआ है। जहां से ट्रेन आसानी से आपको अपने गंतव्य स्थान के लिए मिल जाती है। दिल्ली में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, सराय रोहिल्ला, दिल्ली कैंट इत्यादि बड़े रेलवे स्टेशन है। चांदनी चौक आने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन है।

 

निष्कर्ष

यदि आप प्राचीन भारत को समझने में यकीन रखते हैं, व भारत को कुछ पुराने समय में जाकर देखना चाहते हैं तो चांदनी चौक की गलियां आपका यह सपना अवश्य पूरा कर देंगी। इसके अलावा यह स्थान पर्यटन क्षेत्र के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है; क्योंकि इसके नजदीक लगभग बहुत से प्राचीन स्मारक है जो की दिल्ली को अभिव्यक्त करते हैं।

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